الثلاثاء، 27 مايو 2014

هل أقرت الدسقوليه - تعاليم الرسل بتناول المرأة الحائض ؟

هل أقرت الدسقوليه - تعاليم الرسل بتناول المرأة الحائض ؟


في  مقالي  السابق  عن  تناول  المراة  الحائض  وضع  احد  الأحباء  اقتباس  من  الدسقوليه  يقول  :

"الدسقولية  : 
فان  كنت  أيتها  المرأة  المقيمة  فى  الدم  سبعة  أيام  تفتكرين  انك  صرت  مقفرة  من  الروح  القدس  لهذا  السبب  فانك  اذ  مت  بغتة  تذهبين  و  قد  صرت  غريبة  عن  الروح  القدس  و  تعوزك  الدالة  و  الرجاء  الكائن  لنا  عند  الله  . 
و  لكن  الروح  القدس  ساكن  فيك  بغير  افتراق  لأنه  ليس  بمحصور  في  مكان  واحد  فيجب  عليك  ان  تصلى  كل  حين  و  تنالى  من  الأفخارستيا  و  تغتنمى  حلول  الروح  القدس  عليك 
ايتها  المرأة  ان  كنت  كما  تقولين  بغير  روح  قدس  فى  ايام  عادة  النساء  فالروح  النجس  ملأك  فان  كنت  لا  تصلين  و  لا  تقرأين  الكتب  فانك  تجذبينه  اليك  . 
قولي  ايتها  المرأة  التى  تعلن  انها  غير  طاهرة  طبقا  للاويين  طوال  السبعة  أيام  التي  للدم  كيف  ستطهرين  بعد  هذه  الأيام  بدون  معمودية  ؟
فاذا  كنت  معتمدة  فانك  (  تهدمين  بأفكارك  معمودية  الله  الكاملة  التى  محت  تماما  خطاياك  )"

وكان  ردي  عليه  هو  كشف  ان  كلمة  الافخاريستيا  هي  كلمة  مقحمه  على  النص  وغير  موجودة  في  الاصل  بل  وان  من  دعم  أنها  تعني  الشكر  هو  جورج  حبيب  بباوي  .


وهكذا  يظن  هذا  وكل  من  يتبع  فكره  ان  الشكر  في  الدسقوليه  كناية  عن  الإفخاريستيا  لذا  فإن  اي  كلمة  (شكر)  تعني  بالتبعية  افخاريستيا  !!  ويجوز  من  هذا  المنطلق  ان  تتناول  المرأة  الحائض  !



والغريب  أن  مدّعي  المكانة  العلمية  مثل  جورج  حبيب  بباوي  قام  بتدليس  بإخفائه  حقيقة  هامة  جدا  أن  الإفخاريستيا  والشكر  حسب  فكر  الكنيسة  الأولى  أمران  مختلفان  تماما  وذلك  لان  المصطلحات  اليونانية  التي  كانت  تشير  إلي  كل  من  الشركة  الاغابي  وشركه  الافخاريستيا  كانت  متداخله  ويمكن  ان  تحل  واحدة  مكان  الاخرى  سواء  في  الأسفار  المقدسة  او  الكتابات  المسيحية  المبكرة  .  فكان  هناك  فرقا  شاسعا  بين  وليمة  الاغابي  وبين  الافخاريستيا  لان  الأولى  وليمة  المحبة  بالشكر  يتم  فيها  مباركه  الخبز  والخمر  بشكل  عادي  اما  الافخاريستيا  هي  الاستحالة  الكاملة.
ويتم  استخدام  فعلان  يونانيان  في  هذا  الأمر  هم  افلوجيئو  بمعنى  يبارك  و  افخاريستيئو  بمعنى  يشكر  ليحل  كل  منهما  محل  الاخر  بدون  تفريق  .
لذا  فإن  كلمة  افخاريستيا  (شكر)  في  الكتابات  المسيحية  الأولى  ان  لم  توضح  تماما  وبشكل  واضح  فيما  يليها  تعني  شكر  واغابي  على  اي  شئ[1]
لذا  فإن  اعتبار  ان  ما  تم  اقتباسه  هو  سماح  للمرأة  بالافخاريستيا  خلال  حيضها  هو  استنتاج  لا  يدعمه  اي  عنصر.
ويزيد  عن  هذا  ان  ما  تلا  الدسقوليه  من  قوانين  الآباء  قامت  بالمنع  التام  لتناول  المرأة  الحائض[2]  مما  يجعل  من  الصعب  ان  نقتنع  أن  واضعي  تلك  القوانين  من  قديسي  الكنيسة  خالفوا  الدسقوليه!.
والأقرب  للفهم  ووفقا  للقواعد  السالف  ذكرها  ان  الدكتور  وليم  سليمان  قلادة  في  ترجمته  للدسقوليه  ربطها  بالسر  المقدس  على  سبيل  الاستحياء  والخطأ  المردود.



lمينا اسعد كامل

ملحق من الحوارات والتعليقات

وصلني  الرد  التالي  من  الصديق  الذي  اثار  موضوع  الدسقوليه  –  اقتبست  الجزء  الخاص  بمعنى  كلمة  شكر  وكلمة  افخاريستيا  اما  موضوع  لمس  المسيح  للمرأة  نافزة  الدم  فسأفرد  له  موضوعا  منفصلا.
يقول  الأخ  الحبيب

"مع  العلم  انه  الحقيقة  بتقول  : 
إفخارستيا  بالإنجليزية  Eucharist،  وأصلها  كلمة  يونانية  ή  εύχαριστία  وبالقبطية  Euxarictia:  معناها  شكر،  وتطلق  على  سر  التناول  -  سر  الشكر  -  سر  الشركة  -  كسر  الخبز  -العشاء  الرباني-  العشاء  السري.  (المصدر:  موقع  الأنبا  تكلا.  قاموس  المصطلحات  الكنسية  . http://st-takla.org/.../1-Cop.../Efkharestia__Eucharist.html
كمان  : 
الإفخارستيا
الكلمة  تعني  الشكر.  وهكذا  فعل  السيد  المسيح  أن  أخذ  خبزًا  وشكر  وأخذ  كأسًا  وشكر  (لو19:22+  مت27:26)
المسيح  كان  يشكر  الآب  كرأس  للكنيسة  على  الحياة  التي  أعطاها  الله  للإنسان،  ولما  فقد  الإنسان  الحياة،  تجسد  المسيح  وأعطانا  جسده  نأكله  فنحيا  للأبد.  فالشكر  هنا  هو  على  الحياة  التي  أعطاها  الله  لنا  أولًا  عِند  خِلْقَة  آدم،  وأعادها  لنا  بعد  أن  فقدناها.  لذلك  يصلي  الكاهن  في  القداس  (قدوس  قدوس  قدوس..  الذي  جبلنا  وخلقنا  ووضعنا  في  فردوس  النعيم.  وعندما  خالفنا  وصيتك  بغواية  الحية  سقطنا  من  الحياة  الأبدية..  فلم  تتركنا..  وفي  آخر  الأيام  ظهرت  لنا  نحن  الجلوس  ..)  [ثم  تأتي  صلوات  التقديس  ويتم  تحول  الخبز  إلى  جسد  والخمر  إلى  دم]  ويصلي  الكاهن  (يُعطى  لغفران  الخطايا  وحياة  أبدية  لمن  يتناول  منه)  فالله  أعاد  لنا  الحياة  الأبدية  بفداء  ابنه  وبهذا  السر.
والشكر  نجده  ليس  فقط  في  كلمة  وشكر  التي  قالها  السيد  عند  تأسيس  السر،  بل  بعد  تأسيس  السر  "سبح  الرب  مع  تلاميذه"  (مت30:26)  والسيد  شكر  بالنيابة  عنا  وكرأس  لجسد  الكنيسة،  إذ  أننا  لا  ندرك  ما  حصلنا  عليه  تماما،  فنحن  لا  ندرك  سوى  عطايا  الله  المادية،  ونشكره  حين  يعطيها  لنا.  أما  بالنسبة  لعطية  الحياة  فنحن  لم  نتعود  أن  نشكر  الله  عليها  إذ  لا  نفهم  ما  حصلنا  عليه  .
المصدر  :  كتاب  الأسرار  الكنسية  السبعة  للقس  أنطونيوس  فكرى  http://st-takla.org/.../Holy-Sacraments__04-Eucharist...
بالتالى  يا  استاذ  مينا  يتضح  بصورة  لا  تقبل  الشك  انه  كلمة  أفخارستيا  حسب  تعليم  الكنيسة  و  الكتاب  معناها  ((  شكر  ))  و  ما  ذكر  على  النوال  من  الشكر  فى  الدسقولية  هو  نوال  من  الأفخارستيا  حسب  المفهوم  الكنسى  و  الدليل  ان  الدسقولية  تكمل  النص  قائلة  : 
و  تغتنمى  حلول  الروح  القدس  عليك 
و  هذا  ذكرته  الدسقولية  بعد  قولها  تنالى  من  الشكر  (  الأفخارستيا  )  اى  ان  هناك  حلول  للروح  القدس  على  تلك  المرأة  التى  تحدثها  الدسقولية  و  هذا  هو  صميم  نوال  الانسان  من  الأفخارستيا  (  القدسات  للقديسين  ) 
اما  عن  وصف  حضرتك  لكلمة  أغابى  انها  هى  المقصود  بها  الشكر  تقول  الموسوعة  الكنسية  : 
أغابي
كلمة  يونانية  αγάπη،  معناها  محبة  `agapy  وتطلق  على  وليمة  المحبة  التي  كانت  تقيمها  الكنيسة  بعد  القداس  الإلهي.  وهو  وليمة  للفقراء،  يشترك  فيها  جميع  الشعب  معًا..
http://st-takla.org/.../1-Coptic.../Aghaby-Aghapi.html
و  هذا  عكس  ما  قد  تفضلت  حضرتك  بطرحه  انه  الشكر  هو  الأغابى  فى  اللغة  الأصلية  !! 
هكذا  يكون  قد  تم  ردى  على  طرح  حضرتك  فى  هذا  المقال  و  الأن  نعود  الى  كلام  حضرتك  فى  المقال  السابق  ..."

وقد  اعجبني  وبشده  الاسلوب  الذي  حاول  به  الصديق  المحبوب  ان  يجيب  على  التساؤل  ويبحث  في  المعاجم  والقواميس  .
ولكن  فاته  امر  هام  جدا  رغم  صحه  ما  سبق  وتقدم  به
ان  اقتباساته  كانت  من  ما  يطلق  عليه  اليوناني  الحديث  أي  بعد  استقرار  المعاني  والكلمات  في  قرون  متاخره.
وقد  ذكرت  في  مقالي  سابقا  :
"الإفخاريستيا    والشكر    حسب    فكر    الكنيسة    الأولى    أمران    مختلفان    تماما    وذلك    لان    المصطلحات    اليونانية    التي    كانت    تشير    إلي    كل    من    الشركة    الاغابي    وشركه    الافخاريستيا    كانت    متداخله    ويمكن    ان    تحل    واحدة    مكان    الاخرى    سواء    في    الأسفار    المقدسة    او    الكتابات    المسيحية    المبكرة  "
ولم  يلتفت  الصديق  الي  كلمة  الكتابات  المبكره  للمسيحيه  ..
ودعنا  نقدم  دليلا  لغويا  واحدا  يضحد  كل  ما  تقدم  ويؤكد  على  فكره  تطور  الكلمة  في  الكتابات  المسيحية  .
بالنظر  الي  انجيل  يوحنا  6  :    معجزة  إشباع  الجموع 

Joh  6:11    وأخذ  يسوع  الأرغفة  وشكر  ووزع  على  التلاميذ  والتلاميذ  أعطوا  المتكئين.  وكذلك  من  السمكتين  بقدر  ما  شاءوا.

Joh  6:11  ἔλαβενG2983  V-2AAI-3S  οὖνG3767  CONJ  τοὺςG3588  T-APM  ἄρτουςG740  N-APM  ὁG3588  T-NSM  ἸησοῦςG2424  N-NSM  καὶG2532  CONJ  εὐχαρίστησενG2168  V-AAI-3S  καὶG2532  CONJ  ἔδωκενG1325  V-AAI-3S  τοῖςG3588  T-DPM  ἀνακειμένοις,G345  V-PNP-DPM  ὁμοίωςG3668  ADV  καὶG2532  CONJ  ἐκG1537  PREP  τῶνG3588  T-GPN  ὀψαρίωνG3795  N-GPN  ὅσονG3745  K-ASN  ἤθελον.G2309  V-IAI-3P
لاحظ  كلمة  (شكر)  (افخاريستيو)  ..  هل  هنا  ما  قام  به  المسيح  هو  سر  الافخاريستيا  ؟ 
وفقا  للجدول  التالي  هي  ذات  الكلمة  المستخدمة  في  العشاء  الرباني  (سر  الافخاريستيا)  في  انجيل  لوقا  اصحاح  22

G2168
εὐχαριστέω
eucharisteō
Total  KJV  Occurrences:  39
thanks,  26
Mat_15:36,  Mat_26:27,  Mar_8:6,  Mar_14:23,  Luk_22:16-17  (2),  Luk_22:19,  Joh_6:11,  Joh_6:23,  Act_27:35,  Rom_14:6  (2),  Rom_16:4,  1Co_10:30,  1Co_11:24,  1Co_14:17,  2Co_1:11,  Eph_1:16,  Eph_5:20,  Col_1:3,  Col_1:12,  Col_3:17,  1Th_1:2,  1Th_5:18,  2Th_2:13,  Rev_11:17
thank,  11
Luk_18:11,  Joh_11:41,  Rom_1:8,  Rom_7:25,  1Co_1:4,  1Co_1:14,  1Co_14:18,  Phi_1:3,  1Th_2:13,  2Th_1:3,  Phm_1:4
thanked,  1
Act_28:15
thankful,  1
Rom_1:21

ويتحدث  عنها  قاموس  سترونج  قائلا  :
G2168
εὐχαριστέω
eucharisteō
yoo-khar-is-teh'-o
From  G2170;  to  be  grateful,  that  is,  (actually)  to  express  gratitude  (towards);  specifically  to  say  grace  at  a  meal:  -  (give)  thank  (-ful,  -s).
اذن  صديقي  هذا  يؤكد  ما  ذكرته  انا  وحاولت  انت  انكاره.
وقد  شرح  هذا  الامر  جيدا  الأب  اثناسيوس  المقاري  في  كتابه  :



حين  قال  :



كما  اشار  اليها  كل  من  الحبر  الجليل  نيافة  الأنبا  بيشوي  والدكتور  موريس  تواضروس  في  :


قائلين  :










اما  عن  قولك  اغتنام  الروح  القدس  دليل  على  انه  سر  الافخاريستيا  فعفوا  صديقي  فالاقتباسات  من  القوانين  الرسوليه  اللاحقة  تؤكد  انه  من  المستحيل  ان  يخالف  هذا  الامر  كل  من  تلاه  .  بل  الصواب  انهم  ادركوا  ان  معناها  هو  ان  الروح  القدس  لم  يعزلهم  (من  وليمه  اغابي  المؤمنين)

انتى  ردي  على  حضرتك  مؤقتا  حول  هذه  النقطة  بعد  اثباتها  بالمراجع  اتمنى  ان  تتراجع  عما  ذهبت  اليه  وفي  انتظار  ردك

ملحوظه  :  تم  ارفاق  الرد  الخاص  بك  والرد  الخاص  بي  بالموضوع  الاصلي





[1]  للمزيد  :  الديداخي  –  تعليم  الرسل  1/1  –  الراهب  اثناسيوس  المقاري

[2]  وضعنا  الاقتباسات  سابقا  في  مقالنا  السابق  ومقاله  المرأة  والدماء


منقول عن : المتحدث الرسمى بأسم رابطة حماة الايمان 

0 التعليقات:

إرسال تعليق

Google+ Followers

أرشيف المدونة الإلكترونية

Twitter Delicious Facebook Digg Stumbleupon Favorites More